संवाददाता : सरकार बच्चो के भविष्य के साथ कैसा खेलवाड़ कर रही है इसका ताजा उदाहरण है देवाल ब्लॉक का राजकीय इंटर कॉलेज ल्वाणी। दरअसल पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनावो से पूर्व प्रदेश के 66 स्कूलो को उच्चीकृत करने की सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुये शिक्षा विभाग को आदेश दिया था की आगामी शिक्षण सत्र से इन स्कूलो में कक्षाओ का संचालन किया जाय तथा जब तक इन इन स्कूलो में शिक्षको और शिक्षणेतर क्रमियों के पदो का सृजन नही होता तब तक इनके मूल विद्यालय के शिक्षको के द्वारा पठन –पठान का कार्य संपादित किया जाय। लेकिन चार शिक्षण सत्र गुजर चुके है और अभी तक यहां प्रवक्ताओं के तैनाती तो दूर पद सृजित तक नहीं हुए। ऐसे में हाईस्कूल स्तर के शिक्षक ही इंटर के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। स्कूलों के उच्चीकरण से क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद थी कि अब उनके बच्चों को दसवीं की बाद की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन प्रदेश सरकार के लापरवाह रवैये के चलते चार साल बाद भी लोगों की उम्मीद साकार नहीं हो पाई। भले ही सरकार के मुखिया हर कार्यक्रम में पहाड़ में शिक्षा प्रणाली को सुधारने की बात करते है पर सच्चाई कुछ और ही बया करती है।
ग्रामीणो के ओर से लगातार जनपद एव प्रदेश स्तर पर विभाग से शिक्षको की तैनाती की मांग की जा रही है। ग्रामीणो ने पिछले वर्ष अप्रैल माह में मुख्यमंत्री हरीश रावत के वान दौरे के दौरान इस मांग को उठाया था जिस पर मुख्यमंत्री ने ल्वाणी इंटर कॉलेज की वित्त स्वीकृति की घोषणा की थी लेकिन हैरानी की बात यहा है की मुख्यमंत्री के घोषणा के 10 माह बाद भी शिक्षा जैसे गंभीर विषय से जुड़े मुद्धे पर कोई सकारात्मक कार्यवाही होती नही दिख रही है। प्रदेश सरकार जहा एक और पहाड़ से पलायन रोकने के लिए कारगर कदम उठाने की बात कर रही है वही पलायन के मुख्य कारण शिक्षा के लचर प्रणाली को सुधारने की ओर कोई कदम नही उठा रही है। सरकार के इस रवैया से ग्रामीणो में खासा आक्रोश देखने को मिला है देवाल प्रखण्ड के ल्वाणी,सुया, हरनी, ताजपुर , काण्डै,उलंग्रा,फलदियागांव के ग्रामीणो को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है वही पीटीए अध्यक्ष दर्शन बिष्ट का कहना है की हम लगातार जनप्रितिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग भेज रहे है शासकीय प्रक्रिया में समय की बाध्यता की बात कही जा रही है।






