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Sunday, February 12, 2017

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Sunday, February 28, 2016

ढाई साल से टेंडर प्रक्रिया में पिंडर घाटी के झूला पुल

कर्णप्रयाग: वर्ष 2013 में आयी विनाशकारी दैवीय आपदा से प्रदेश के कई हिस्सो का संपर्क एक दुसरे से अलग हो गया था। पिण्डरघाटी में भी इस विनाशकारी दैवीय आपदा से कई रास्ते एंव झुला पुल क्षतिग्रस्त हो गये थें। लेकिन सरकार के लचर रवैये के कारण आज भी ग्रामीणो की मुसीबते जस की तस है। पिण्डरघाटी के देवाल से कर्णप्रयाग तक आपदा से क्षतिग्रस्त पाॅच पुलो का निर्माण कार्य ना होने के कारण 150 गाॅव के ग्रामीणो को इसका खामियाजा भुगतना पड रहा है। जून 2013 में आयी आपदा ने देवाल के सुपलीगाड एंव बोरागाड, थराली के चेपडो एंव हरमनी, नारायणबगड में मुख्य बाजार में बना झुला पुल बहा दिया था। जिसके बाद से ग्रामीण अस्थायी पुलिया, ट्राली, नदियाॅ एव लम्बे आवाजाही करने को मजबुर है। 
सरकार के मुखिया जहाॅ पुलो की जल्द निर्माण की बात कह रहे है वही अधिकारीयो की हिलाहवली से आपदा के ढाई साल बाद भी झुला पुलो का कार्य टेंडर प्रकिया तक सिमटा है। हालाॅकि वैक्लपिक व्यव्स्था के तौर पर हस्तचालित ट्राली लगाई गयी थी लेकिन ट्राली खिचने में  लोगो  की  उगुलिया जख्मी हो चुकी थी जिसके बाद विभाग ने बोरागाड़ और चेपड़ों में करीब 65 लाख की लागत से स्वचालित ट्रालियां लगाईं इनमें भी तकनीकी खराबी होने लगी। हालांकि पुलों के निर्माण के लिए विश्व बैंक डिवीजन को करोड़ों की धनराशि शासन से अवमुक्त हुई लेकिन पुल आज तक नहीं बने। स्थानीय ग्रामीण ढाई साल बाद भी नदी पर लकड़ियो ओर तख्ते बिछाकर या लंबे आवाजाही के लिए मजबूर है क्षेत्रीय ग्रामीण लगातार झूला पुलों की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन.प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। पिंडर घाटी के लिंगड़ी, त्रिकोट, सेरा, विजयपुर, अश्रुं, बाघाखेत,बुड़जोला, ओडर, हड़ाप समेत 150 से अधिक गांव की 1500 आबादी इसका खामियाजा भुगत रही है। नारायणबगड़ में जहाँ ग्रामीण दो से ढाई किमी घूम कर जा रहे है वही चेपड़ियों में पंद्रह किमी चल कर ग्रामीण अपने गाँव पहुच रहे है। क्षेत्रीय ग्रामीणो में जहा सरकार के प्रति आक्रोश दिखाई दे रहा है वही स्थानीय जनप्रतिनिधि हमेशा सरकारी प्रक्रिया के दुहाई देते नजर आ रहे है। 

चार साल बाद भी हाईस्कूल के शिक्षको भरोसे इंटर कॉलेज

संवाददाता : सरकार बच्चो के भविष्य के साथ कैसा खेलवाड़ कर रही है इसका ताजा उदाहरण है देवाल ब्लॉक का राजकीय इंटर कॉलेज ल्वाणी। दरअसल पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनावो से पूर्व प्रदेश के 66 स्कूलो को उच्चीकृत करने की सैद्धांतिक स्वीकृति देते हुये शिक्षा विभाग को आदेश दिया था की आगामी शिक्षण सत्र से इन स्कूलो में कक्षाओ का संचालन किया जाय तथा जब तक इन इन स्कूलो में शिक्षको और शिक्षणेतर क्रमियों के पदो का सृजन नही होता तब तक इनके मूल विद्यालय के शिक्षको के द्वारा पठन –पठान का कार्य संपादित किया जाय। लेकिन चार शिक्षण सत्र गुजर चुके है और अभी तक यहां प्रवक्ताओं के तैनाती तो दूर पद सृजित तक नहीं हुए। ऐसे में हाईस्कूल स्तर के शिक्षक ही इंटर के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। स्कूलों के उच्चीकरण से क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद थी कि अब उनके बच्चों को दसवीं की बाद की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन प्रदेश सरकार के लापरवाह रवैये के चलते चार साल बाद भी लोगों की उम्मीद साकार नहीं हो पाई। भले ही सरकार के मुखिया हर कार्यक्रम में पहाड़ में शिक्षा प्रणाली को सुधारने की बात करते है पर सच्चाई कुछ और ही बया करती है। 

ग्रामीणो के ओर से लगातार जनपद एव प्रदेश स्तर पर विभाग से शिक्षको की तैनाती की मांग की जा रही है। ग्रामीणो ने पिछले वर्ष अप्रैल माह में मुख्यमंत्री हरीश रावत के वान दौरे के दौरान इस मांग को उठाया था जिस पर मुख्यमंत्री ने ल्वाणी इंटर कॉलेज की वित्त स्वीकृति की घोषणा की थी लेकिन हैरानी की बात यहा है की मुख्यमंत्री के घोषणा के 10 माह बाद भी शिक्षा जैसे गंभीर विषय से जुड़े मुद्धे पर कोई सकारात्मक कार्यवाही होती नही दिख रही है। प्रदेश सरकार जहा एक और पहाड़ से पलायन रोकने के लिए कारगर कदम उठाने की बात कर रही है वही पलायन के मुख्य कारण शिक्षा के लचर प्रणाली को सुधारने की ओर कोई कदम नही उठा रही है। सरकार के इस रवैया से ग्रामीणो में खासा आक्रोश देखने को मिला है देवाल प्रखण्ड के ल्वाणी,सुया, हरनी, ताजपुर , काण्डै,उलंग्रा,फलदियागांव के ग्रामीणो को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है वही पीटीए अध्यक्ष दर्शन बिष्ट का कहना है की हम लगातार जनप्रितिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग भेज रहे है शासकीय प्रक्रिया में समय की बाध्यता की बात कही जा रही है। 

सहकारिता के माध्यम से आत्म निर्भर बनने की प्रेरणा दे गये महेंद्र कफोला

कुलसारी/चमोली: आजीविका परियोजना के हरीकुल स्वायत सहकारिता कुलसारी चमोली में समूह की महिलाओ एव ग्रामीणो ने परियोजना के कृषि विपणन अधिकारी महेंद्र कफोला के स्थानतरण पर एक कार्यक्रम का आयोजन कर विदाई दी। कार्यक्रम में ग्रामीणो ने महेंद्र से आने वाले समय में सहयोग की आशा व्यक्त की। मूल रूप से नगरासु जनपद रुद्रप्रयाग के महेंद्र कफोला ने हार्क संस्था में दो साल सेवा देने के बाद वर्ष 2010 में आजीविका परियोजना के हरीकुल स्वायत सहकारिता में ज्वाइन किया। महेंद्र ने अपने कार्यकाल के दौरान सहकारिता के साथ ही आर्थिक एव सामाजिक समृद्धि के क्षेत्र में ग्रामीणो को कई गुर सिखाये। महेंद्र के पदोउन्नति पर जहाँ ग्रामीणो में खुशी भी है वही अपने से दूर जाते देख समूह की महिलाये भावुक दिखी।

स्थानीय निवासीयो के माने तो महेंद्र कफोला के हरीकुल स्वायत सहकारीता में आने के बाद स्थानीय लोगो को काफी मदद मिली। क्योकि आज भी पहाड़ के कई गाँव है जहाँ आज भी संचार के कोई साधन नही है। इस परिस्थिति में महेंद्र ने ग्रामीणो को हर दम पर सहयोग किया और वे अपने सेवा के दौरान क्षेत्र में गाँव गाँव घूम कर लोगो को सरकारी योजनाओ को जानकारी, शिक्षा के प्रति जागरूकता, स्वच्छता पर समय समय पर ग्रामीणो के साथ विचार विमर्श करते रहते थे। महेंद्र कफोला ने अपने कार्यकाल में समूह के महिलाओ को आजीविका बढ़ाने के लिए पहाड़ में उपलब्ध संसाधनो के प्रयोग कर करने के कई गुर ग्रामीणो को दिये। प्रगति जन कल्याण समिति के सचिव प्रकाश देवराड़ी कहते है – हमने पिछले वर्षो में साथ काम करने का मौका मिला उनके पहाड़ प्रेम की भावना आज युवा पीड़ी के लिए प्रेरणादायी है। उनके कार्य करने का तरीका एक पारावारिक सोच की तरह है । कार्यक्रम में शिशुपाल सिंह अनीता रावत, दीपा देवी कुसमा देवी मंशा देवी सावत्री देवी सुशीला शशि समूह से जुड़े महिलाओ सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।